Editorial

E20 पर फिलहाल लगेगा ब्रेक! सरकार बोली- 20% से आगे एथेनॉल मिलाने का अभी कोई फैसला नहीं

Rahul Sharma — Journalist
Rahul Sharma
July 28, 20264 min read
E20 पर फिलहाल लगेगा ब्रेक! सरकार बोली- 20% से आगे एथेनॉल मिलाने का अभी कोई फैसला नहीं — article by Rahul Sharma

क्या भारत में E20 के बाद E25 या E30 पेट्रोल आने वाला है? सरकार ने संसद में साफ किया है कि फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। जानिए आगे क्या होगा, पुरानी गाड़ियों पर क्या असर है और सरकार ने क्या कहा।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रिकॉर्ड समय में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक था कि क्या अब अगला कदम E25 या E30 होगा?
सरकार ने अब पहली बार संसद में इस सवाल का सीधा जवाब दिया है। जवाब सिर्फ इतना नहीं है कि "अभी नहीं", बल्कि यह भी बताया गया है कि आगे का रास्ता कैसा होगा, किन शर्तों पर फैसला लिया जाएगा और क्यों फिलहाल सरकार जल्दबाजी के मूड में नहीं है।

E20 के बाद क्या E25 आने वाला है? जवाब साफ है...

अगर आपको लग रहा था कि E20 सिर्फ एक पड़ाव था और अब जल्दी ही E25 या E30 आने वाला है, तो फिलहाल ऐसा नहीं होने जा रहा।
सरकार ने संसद में स्पष्ट कहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने का अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में यदि कभी ऐसा प्रस्ताव आता भी है, तो उससे पहले वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण, ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों से व्यापक चर्चा की जाएगी।
यानी फिलहाल देश का लक्ष्य E20 को सफलतापूर्वक स्थिर करना है, न कि तुरंत अगली छलांग लगाना।

इसका मतलब आम वाहन मालिक के लिए क्या है?

यह जानकारी उन करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है, जो अभी भी सोचते हैं कि कहीं कुछ वर्षों में फिर नया पेट्रोल न आ जाए।

कम से कम फिलहाल:

E20 ही राष्ट्रीय मानक रहेगा।
नई गाड़ियों के लिए अचानक नया ईंधन नहीं आएगा।
ऑटो कंपनियों को भी तत्काल नए इंजन विकसित करने का दबाव नहीं होगा।
पेट्रोल पंपों पर E25 या E30 की तैयारी शुरू होने जैसी स्थिति नहीं है।

क्या भविष्य में E25 या E30 कभी नहीं आएगा?

नहीं, सरकार ने ऐसा नहीं कहा है।
सरकार का कहना है कि यदि भविष्य में 20 प्रतिशत से अधिक मिश्रण पर विचार होगा तो वह केवल विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद ही होगा। यानी रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन फिलहाल कोई समयसीमा या निर्णय मौजूद नहीं है।

सरकार इतनी सावधानी क्यों बरत रही है?

E20 तक पहुंचना भी एक दिन में नहीं हुआ।
सरकार ने संसद में बताया कि भारत में एथेनॉल मिश्रण की यात्रा लगभग दो दशक पुरानी है। 2001 में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ और उसके बाद धीरे-धीरे मिश्रण बढ़ाया गया। 2013-14 में जहां औसत मिश्रण करीब 1.53 प्रतिशत था, वहीं 2025-26 में यह 20 प्रतिशत तक पहुंचा।
यानी सरकार का संदेश साफ है—ईंधन नीति में तेजी नहीं, बल्कि चरणबद्ध बदलाव ही अपनाया जाएगा।

क्या सरकार को अभी भी पुरानी गाड़ियों की चिंता है?

संसद में दिए गए जवाब का एक दिलचस्प हिस्सा यह भी है।
सरकार का कहना है कि देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें E15+ और E20 मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रही हैं। उपलब्ध सेवा रिकॉर्ड के आधार पर E20 के कारण बड़े पैमाने पर इंजन फेल होने या वाहन खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है। सरकार ने यह भी कहा है कि यदि E20 से वास्तव में व्यापक इंजन खराबी होती, तो बड़े पैमाने पर वारंटी क्लेम और सर्विस रिकॉर्ड में दिखाई देती, जबकि ऐसा नहीं हुआ।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर वाहन समान व्यवहार करेगा। वाहन निर्माता की सलाह और वाहन की तकनीकी अनुकूलता आज भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

E20 से आगे जाने से पहले किन बातों की होगी जांच?

सरकार के अनुसार भविष्य में यदि उच्च एथेनॉल मिश्रण पर विचार हुआ तो कई पहलुओं की जांच होगी। वैज्ञानिक परीक्षण होंगे कि इंजन लंबे समय तक ऐसे ईंधन पर कैसा प्रदर्शन करता है। ऑटोमोबाइल कंपनियों से राय ली जाएगी कि नई और पुरानी गाड़ियों पर इसका क्या असर पड़ सकता है। तेल कंपनियां आपूर्ति व्यवस्था का आकलन करेंगी और अनुसंधान संस्थान तकनीकी व्यवहार्यता की पुष्टि करेंगे। इसके बाद ही कोई नीति आगे बढ़ेगी।
सरकार ने यह भी दोहराया कि एथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य सिर्फ पेट्रोल बदलना नहीं है। इस कार्यक्रम को विदेशी मुद्रा बचाने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, किसानों को अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराने और कार्बन उत्सर्जन कम करने जैसे कई लक्ष्यों से जोड़ा गया है। संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार EBP कार्यक्रम से अब तक किसानों की अनुमानित आय में 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान और विदेशी मुद्रा की लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है।

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