Editorial

E20 Fuel: आपकी गाड़ी के टैंक में पहुंचने से पहले आपको इसके बारे में क्या-क्या जान लेना चाहिए?

Rahul Sharma — Journalist
Rahul Sharma
July 15, 20267 min read
E20 Fuel: आपकी गाड़ी के टैंक में पहुंचने से पहले आपको इसके बारे में क्या-क्या जान लेना चाहिए? — article by Rahul Sharma

E20 Fuel को लेकर भ्रम सबसे ज्यादा है और तथ्य सबसे कम। जानिए भारत में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की शुरुआत कब हुई, इंजन पर इसका वास्तविक असर क्या है और आपकी गाड़ी के लिए इसे लेकर क्या जानना जरूरी है।

पिछले कुछ समय में पेट्रोल पंप पर एक नया शब्द दिखाई देने लगा है, E20। कुछ लोगों ने इसे देखकर पेट्रोल भरवा लिया, कुछ ने पेट्रोल पंप कर्मचारी से सवाल पूछा और कुछ ने इंटरनेट पर जाकर यह खोजा कि कहीं इससे इंजन खराब तो नहीं हो जाएगा।
सच कहें तो E20 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा दो जगह हो रही है। पहली पेट्रोल पंप पर और दूसरी सोशल मीडिया पर। कहीं इसे भविष्य का ईंधन बताया जा रहा है तो कहीं इसे गाड़ियों के लिए नुकसानदायक कहा जा रहा है। लेकिन इन दोनों के बीच सबसे महत्वपूर्ण चीज गायब है, और वह है तथ्य।
अगर आपकी बाइक, स्कूटर या कार पेट्रोल से चलती है, तो E20 Fuel के बारे में आपको कुछ बातें जरूर जाननी चाहिए। क्योंकि यह कोई ऐसा प्रयोग नहीं है, जो अचानक भारत में शुरू हो गया हो। इसकी कहानी दो दशक से भी ज्यादा पुरानी है और दिलचस्प बात यह है कि आप पिछले कई वर्षों से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल करते आ रहे हैं, बस इसकी मात्रा पहले कम थी और इस पर चर्चा भी कम होती थी।

E20 Fuel आखिर हमारे पेट्रोल पंप तक कैसे पहुंचा?

E20 अचानक भारत के पेट्रोल पंपों पर नहीं आया। यह एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम है। भारत लंबे समय से अपने ईंधन मिश्रण कार्यक्रम पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल एक नया ईंधन बाजार में उतारना नहीं है, बल्कि पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को बढ़ावा देना भी है।
E20 उसी यात्रा का अगला चरण है। यानी इसे एक नए ईंधन की तरह नहीं, बल्कि भारत के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के स्वाभाविक विस्तार के रूप में समझना ज्यादा उचित होगा।

भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की शुरुआत कब हुई?

भारत में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2003 में चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की गई थी। उस समय पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा काफी कम थी। बाद के वर्षों में इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया।
दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों को आज E20 देखकर यह लग रहा है कि पेट्रोल में पहली बार कुछ मिलाया जा रहा है, वे संभवतः वर्षों से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले यह चर्चा का विषय नहीं था।

E20 नाम का मतलब क्या है?

E20 में 'E' का मतलब Ethanol है और '20' का मतलब है कि ईंधन में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण है। नाम सुनने में भले ही तकनीकी लगे, लेकिन इसका मतलब काफी सरल है। जिस तरह कई देशों में अलग-अलग प्रतिशत के मिश्रित ईंधन इस्तेमाल किए जाते हैं, उसी तरह E20 भी एक निर्धारित अनुपात वाला ईंधन है।

सरकार इसे क्यों बढ़ावा दे रही है?

इसका एक कारण नहीं है। इसके पीछे कई उद्देश्य हैं। इनमें पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू स्तर पर एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना और वैकल्पिक ईंधनों की दिशा में आगे बढ़ना शामिल है। भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करते हैं। ऐसे में ईंधन मिश्रण कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

दुनिया के दूसरे देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का कितना पुराना इतिहास है?

अगर आपको लग रहा है कि भारत इस दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, तो यह जानना दिलचस्प होगा कि दुनिया के कई देश दशकों से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ब्राजील को अक्सर इस क्षेत्र का अग्रणी देश माना जाता है। वहां लंबे समय से उच्च प्रतिशत वाले एथेनॉल मिश्रित ईंधनों का उपयोग किया जाता रहा है। अमेरिका में भी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का व्यापक उपयोग होता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर देश की वाहन तकनीक, ईंधन नीति और मिश्रण प्रतिशत अलग-अलग होते हैं।
इसलिए किसी दूसरे देश के अनुभव को भारत पर सीधे लागू करना हमेशा सही नहीं होता।

सबसे बड़ा सवाल, क्या इससे इंजन पर असर पड़ता है?

यह शायद सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है। इसका जवाब न तो पूरी तरह 'हां' है और न ही पूरी तरह 'नहीं'। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका वाहन किस ईंधन मिश्रण के लिए डिजाइन किया गया है। अगर किसी वाहन को E20 को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, तो उसके इंजन और उससे जुड़े अन्य पुर्जे उसी अनुरूप तैयार किए जाते हैं। ऐसे वाहनों में E20 को लेकर अनावश्यक चिंता की जरूरत नहीं है।
समस्या तब पैदा होती है, जब लोग सभी गाड़ियों को एक ही नजरिए से देखने लगते हैं। वास्तविकता यह है कि अलग-अलग मॉडल और निर्माण वर्ष के अनुसार वाहन निर्माताओं की सिफारिशें अलग हो सकती हैं।

अगर असर पड़ता है, तो किन परिस्थितियों में और किन गाड़ियों पर?

यहीं पर सबसे ज्यादा भ्रम फैलाया जाता है।
अगर आपके पास पुराना वाहन है, तो यह मान लेना कि E20 आपके इंजन को तत्काल नुकसान पहुंचा देगा, तकनीकी रूप से सही नहीं है। उसी तरह यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि हर पुराना वाहन बिना किसी प्रभाव के E20 के लिए उपयुक्त है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने वाहन निर्माता की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा किया जाए। यदि कंपनी ने आपके मॉडल को E20 के लिए उपयुक्त बताया है, तो चिंता की बात नहीं है। यदि नहीं, तो कंपनी की सलाह को प्राथमिकता देना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

माइलेज को लेकर जो बातें कही जाती हैं, उनमें कितना सच है?

माइलेज को लेकर भी इंटरनेट पर काफी भ्रम देखने को मिलता है। एथेनॉल और पेट्रोल के ऊर्जा गुण एक समान नहीं होते। तकनीकी रूप से एथेनॉल की ऊर्जा घनत्व पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसी वजह से कुछ परिस्थितियों में माइलेज पर मामूली प्रभाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, इसका प्रभाव वाहन की तकनीक, इंजन की डिजाइन और ड्राइविंग की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। इसलिए यह कहना कि हर वाहन में माइलेज निश्चित रूप से एक समान कम हो जाएगा, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।

क्या पुरानी गाड़ियों के मालिकों को कुछ जानने की जरूरत है?

बिल्कुल। सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि आपका वाहन किस प्रकार के ईंधन मिश्रण के लिए स्वीकृत है। यह जानकारी वाहन निर्माता की वेबसाइट, यूजर मैनुअल या अधिकृत सर्विस सेंटर से प्राप्त की जा सकती है।
वाहनों को लेकर सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग सोशल मीडिया वीडियो देखकर तकनीकी निष्कर्ष निकाल लेते हैं। वाहन से जुड़ा कोई भी निर्णय निर्माता कंपनी की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही लेना चाहिए।

क्या आने वाले समय में भारत में इससे अधिक एथेनॉल मिश्रण भी देखने को मिल सकता है?

दुनिया के कई देशों में E20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों का भी उपयोग किया जाता है। इसलिए तकनीकी रूप से यह संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती कि भविष्य में भारत भी इस दिशा में आगे बढ़े।
हालांकि, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें वाहन उद्योग की तैयारी, ईंधन अवसंरचना और भविष्य की नीतिगत आवश्यकताएं शामिल हैं। फिलहाल E20 को समझना और उससे जुड़ी सही जानकारी रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है।

एक आम उपभोक्ता को E20 के बारे में वास्तव में क्या जानना चाहिए?

अगर आपकी गाड़ी पेट्रोल से चलती है, तो आपको तीन बातें जरूर जाननी चाहिए।
पहली, E20 कोई अचानक आया हुआ प्रयोग नहीं है। भारत पिछले दो दशकों से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की दिशा में काम कर रहा है।
दूसरी, हर वाहन एक जैसा नहीं होता। इसलिए अपनी गाड़ी की तकनीकी जानकारी वाहन निर्माता से जरूर जांच लें।
तीसरी, इंटरनेट पर मौजूद हर दावा सही नहीं होता। ईंधन और इंजन से जुड़े निर्णय हमेशा आधिकारिक और तकनीकी स्रोतों के आधार पर ही लेने चाहिए।

और जाते-जाते...

पेट्रोल पंप पर E20 लिखा हुआ बोर्ड देखकर घबराने की जरूरत नहीं है और आंख बंद करके उत्साहित होने की भी नहीं।
नई तकनीक और नई नीतियों को समझने का सबसे अच्छा तरीका हमेशा तथ्य होते हैं। आखिरकार, यह सिर्फ ईंधन की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी भी है, जो धीरे-धीरे हमारी गाड़ियों के टैंक से होकर हमारे भविष्य की ओर बढ़ रहा है।

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