RTI

सरकारी दफ्तर से जवाब न मिले तो क्या करें? जानें RTI में अपील करने का आसान तरीका

Rahul Sharma — Journalist
Rahul Sharma
July 25, 20264 min read
सरकारी दफ्तर से जवाब न मिले तो क्या करें? जानें RTI में अपील करने का आसान तरीका — article by Rahul Sharma

सरकारी दफ्तर से RTI का जवाब न मिले या गलत जानकारी मिले तो क्या करें? जानें, कब और कैसे करें प्रथम और द्वितीय अपील। पूरी कानूनी प्रक्रिया आसान भाषा में समझें और अपनी जानकारी प्राप्त करें। पूरी जानकारी के लिए अभी पढ़ें।

जब हम किसी सरकारी विभाग में कोई जानकारी मांगने के लिए RTI (सूचना का अधिकार) का आवेदन डालते हैं, तो मन में यही उम्मीद होती है कि समय पर सही जवाब मिल जाएगा। लेकिन कई बार बात वैसी नहीं होती जैसी हम सोचते हैं। या तो समय बीत जाने के बाद भी कोई जवाब ही नहीं आता, या फिर जो जवाब मिलता है, वह इतना अधूरा या घुमावदार होता है कि समझ ही नहीं आता कि आगे क्या करें।

अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो निराश होकर बैठने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। RTI कानून में ही इस बात का पूरा इंतजाम किया गया है कि अगर अधिकारी आपको सही जानकारी न दे, तो आप उसके खिलाफ बड़े अधिकारियों के पास जा सकें। इसे ही RTI की भाषा में 'अपील' करना कहते हैं।

आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि किन परिस्थितियों में आप पहली और फिर दूसरी अपील दर्ज करा सकते हैं।

पहली अपील: जब जन सूचना अधिकारी से सही जवाब न मिले
जब आप RTI लगाते हैं, तो वह आवेदन 'जन सूचना अधिकारी' (PIO) के पास जाता है। कानूनन उसे 30 दिनों के भीतर आपको सही और पूरी जानकारी देनी होती है। लेकिन अगर नीचे दी गई परिस्थितियां बनती हैं, तो आप प्रथम अपील (First Appeal) कर सकते हैं:

30 दिन बीत जाने पर भी कोई जवाब न आए: आपने अर्जी दे दी, 30 दिन पूरे हो गए, लेकिन दफ्तर से कोई चिट्ठी या ईमेल नहीं मिला। कानूनन इसे 'जवाब देने से इनकार करना' माना जाता है और यह प्रथम अपील का सीधा आधार बनता है।

अधूरी या भ्रामक जानकारी मिलना: अधिकारी ने जवाब तो दिया, लेकिन वह आधा-अधूरा है। जो मुख्य सवाल आपने पूछा था, उसका जवाब गोल-मोल करके टाल दिया गया है।

गलत जानकारी देना: आपको जो आंकड़े या दस्तावेज दिए गए हैं, वे पूरी तरह गलत या फर्जी महसूस होते हैं।

अनुचित फीस मांगना: अगर अधिकारी आपसे जानकारी देने के नाम पर बहुत ज्यादा या गैर-वाजिब पैसों की मांग करता है, तब भी आप इसके खिलाफ अपील में जा सकते हैं।

ध्यान रखें: प्रथम अपील आपको उसी विभाग के 'प्रथम अपीलीय अधिकारी' (First Appellate Authority) के पास करनी होती है। यह आमतौर पर उसी दफ्तर में जन सूचना अधिकारी से सीनियर रैंक का अधिकारी होता है। जवाब न मिलने या गलत जवाब मिलने के 30 दिनों के भीतर आपको यह अपील भेज देनी चाहिए।

दूसरी अपील: जब पहली अपील से भी बात न बने
कई बार ऐसा होता है कि पहली अपील करने के बाद भी बात नहीं बनती। या तो वहां भी आपकी बात नहीं सुनी जाती, या फिर अपीलीय अधिकारी का फैसला भी आपको सही नहीं लगता। ऐसी स्थिति में कानून आपको एक और बड़ा रास्ता देता है, जिसे द्वितीय अपील (Second Appeal) कहा जाता है।

आप इन परिस्थितियों में दूसरी अपील के लिए जा सकते हैं:

पहली अपील पर 30 से 45 दिनों में कोई फैसला न आना: आपने प्रथम अपीलीय अधिकारी को अपनी समस्या भेजी, लेकिन 30 से 45 दिन बीत जाने के बाद भी वहां से कोई आदेश जारी नहीं हुआ।

प्रथम अपीलीय अधिकारी का फैसला संतोषजनक न होना: सीनियर अधिकारी ने आपकी अपील पर सुनवाई तो की, लेकिन उन्होंने नीचे वाले अधिकारी का ही पक्ष ले लिया और आपकी मांग को खारिज कर दिया।

आदेश के बावजूद जानकारी न मिलना: पहली अपील में आपके पक्ष में फैसला आया और अधिकारी को जानकारी देने का आदेश मिला, फिर भी दफ्तर ने आपको जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

ध्यान रखें: दूसरी अपील सीधे 'सूचना आयोग' (Information Commission) में होती है। अगर मामला राज्य सरकार के किसी विभाग का है तो 'राज्य सूचना आयोग' और अगर केंद्र सरकार के दफ्तर से जुड़ा है तो 'केंद्रीय सूचना आयोग' (CIC) में अपील दाखिल की जाती है। प्रथम अपील का फैसला आने के या 45 दिन बीतने के 90 दिनों के भीतर आप दूसरी अपील दर्ज कर सकते हैं।

चलते-चलते एक काम की बात
RTI की प्रक्रिया देखने में भले थोड़ी लंबी लगे, लेकिन यह एक ऐसा हथियार है जो सरकारी दफ्तरों को आपकी बात सुनने पर मजबूर करता है। जब भी आप अपील लिखें, तो भाषा बिल्कुल साफ़ रखें। उसमें इस बात का स्पष्ट जिक्र करें कि आपने किस तारीख को RTI लगाई थी, आपको क्या जवाब मिला (या क्यों नहीं मिला) और आप उससे संतुष्ट क्यों नहीं हैं। आपका सही तरीका और थोड़ा सा धैर्य आपको आपकी मांगी हुई जानकारी जरूर दिलाएगा।

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